जोधपुर. मारवाड़ में फागण की दस्तक के साथ ही होली के पारंपरिक गीतों का गायन शुरू हो गया है। जोधपुर में श्लील गाली गायन की खास परंपरा रही है जिसे कुछ लोग आगे बढ़ा रहे हैं तो कुछ इसका वर्षो से निर्वहन कर रहे हैं। इन दिनों भीतरी शहर की गलियों में श्लील गाली गायन की तैयारियां जोरों पर हैं। माईदास थानवी को श्लील गाली गायन का सरताज माना जाता है। उनकी गालियों का गजब का क्रेज है। हर साल वर्तमान परिवेश पर नई गालियां लिखी और गाई जाती हैं, लेकिन इस बार कई छोटे मियां भी इसमें पारंगत होकर जलवा दिखाने वाले हैं।
- आल इज वेल व पैसा,पैसा
समाज में फैली कुरीतियों व असमानता की भावना से ऊपर उठने का संदेश देने वाली माईदास की गालियों में इस बार संगीत का अभिनव प्रयोग होगा। प्रेम जोशी ने बताया कि अस्सी बसंत देख चुके माईदास की मधुर आवाज व उनकी अदाएं ही गेर की जान है। माईदास के साथी रामदास, नरोत्तमदास व हीरालाल तथा गुरुदत्त की टीम कोरस देकर जान डाल देती है। गालियां गोविंद कल्ला व कृपाकिशन रिंदी लिख रहे हैं। कई राजस्थानी फिल्मों में संगीत दे चुके संगीतकार ओपी व्यास धुनें बना रहे हैं। गुरुवार को मदनमोहल लाल के नोहरे में गेर गीतों के अभ्यास के दौरान नवयुवकों का हुजूम उमड़ पड़ा।
- कुणाल सुनाएंगे कुछ नयाइस बार ग्यारह वर्षीय कुणाल बिस्सा जलवा दिखाएंगे। जवरी बाजार में रिहर्सल के दौरान गेर के प्रमुख गायक इंद्रप्रकाश जोशी, प्रमोद बिस्सा व रीतेश बोड़ा ने बताया कि रसिया फाग की गालियां रिंदी लिख रहे हैं। संगीत प्रेमकिशोर व्यास छम्मू दे रहे हैं। सह गायक निर्मल व्यास, अभिषेक पुरोहित, संजय बोहरा, राकेश व्यास, चिन्मय जोशी व सर्वोत्तम तथा अविनाश पुरोहित हैं। नन्हे कलाकार कुणाल बिस्सा नई पीढ़ी को संदेश देना चाहते हैं कि हमारी परंपराओं में कई महत्वपूर्ण बातें छिपी हैं जिनका अनुसरण करना चाहि
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