राज्य के मेडिकल कॉलेजों के आला डॉक्टरों का दिल आजकल कामकाज में कम, प्रिंसिपल की कुर्सी के लिए चालू दंगल में ज्यादा लगा हुआ है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल की कुर्सी के दंगल में लोगों की दिलचस्पी सर्वाधिक है। दंगल में एक-दूसरे पर रंग डालने के लिए अधिकतर ने काला रंग चुना है। कुर्सी की दौड़ में जिसको जिससे खतरा है, वे एक-दूसरे पर काला रंग डालने की फिराक में हैं। यह काला रंग आरोप-प्रत्यारोप का है। इस बीच खबरियों से यह भी चर्चा आ रही है कि जो लोग इस कुर्सी पर बैठे हैं, कायदों से परे, उन्हीं का मन कुर्सी से भरता नजर नहीं आ रहा। यहां हम आपको सीधे लफ्जों में बता दें कि यह दंगल एसएमएस मेडिकल कॉलेज और उसकी सीमाओं से परे तीन और मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य के लिए जमा है। इनमें जयपुर, अजमेर, कोटा और जोधपुर मेडिकल कॉलेज अखाड़े बने हुए हैं। अजमेर और जोधपुर मेडिकल कॉलेज की सीटें प्राचार्य पदों के रिक्त स्थान को भरने के लिए कई दिन से विकल्प तलाश रही हैं तो कोटा मेडिकल कॉलेज में बैठे प्राचार्य की कुर्सी भी खाली होने वाली है। फिर भी सर्वाधिक दिलचस्पी राजधानी जयपुर की मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य की सीट को लेकर है। नियमानुसार 31 अगस्त को मौजूदा प्राचार्य का कार्यकाल पूरा हो रहा है। ऐसे में प्राचार्य पद की दौड़ के लिए इसी कॉलेज से 13 उम्मीदवार मैदान में कूद पड़े हैं। हम आपको बता दें कि इस सीट के लिए कई तिकड़म लगानी जरूरी रहती है। इतिहास के पन्नों को उठाकर देखा जाए तो सामने आता है कि पोस्ट के लिए बने नियमों के अलावा भी बातें हैं, जिनके मायने ज्यादा हैं। जैसे किस उम्मीदवार के पास किस नेताजी का नाम जुड़ा है..‘गांधीजी’ का आशीर्वाद जो ‘ऊपर’ तक दिखाना जरूरी है..वगैरह-वगैरह। अब यह दंगल मुहब्बत और जंग दोनों का है।

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