मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

होली पर नहीं होगा पूरी रात धमाल

भास्कर न्यूज & पालीहर साल रंगों के पर्व होली पर पूरी रात होने वाली धमाल इस बार नहीं हो सकती है। तिथियों में घटत—बढ़त व अधिक मास के कारण करीब 19 साल बाद फरवरी में आ रही होली के साथ ही पंचांग में इस बार होलिका दहन का मुर्हूत भी सांझ ढलते ही आ रहा है।रंगों की बरसात,फाल्गुनी माहौल, हंसी—ठिठोली के स्वर तथा मस्ती भरे अंदाज के लिए प्रख्यात होली के पर्व पर धमाल दो दिन पहले ही जिलेभर में शुरुआत हो जाती है। जो होलिका दहन की पूरी रात तथा दूसरे दिन धुलंडी को तो परवान पर पहुंच जाती है। पिछले कुछेक सालों को छोड़े तो हर बार होलिका दहन का मुहूर्त पंचांग के अनुसार रात में ही आता है, इसके चलते पूरी रात को होली की धमचक रहती है। युवा वर्ग तो होली की मस्ती में इस कदर डूबा रहता है ,कि उनको पता ही नहीं चलता कि कब सुबह हो जाती है। पंडित महेंद्र रावल के अनुसार होलाष्टक रविवार को शाम के बाद लग गया है। इसके साथ ही 28 फरवरी रात तक कोई शुभ कार्य नहीं होगा। पूर्णिमा को शाम तक प्रदोषकाल भी रहेगा। होलिका दहन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 28 फरवरी को शाम 6.30 बजे से रात 9.07 बजे तक रहेगा। मगर मुहूर्त की शुरुआत में ही दहन अधिक श्रेष्ठ है। इस साल दो वैशाख : भगवान की भक्ति के लिए इस बार दो वैशाख माह आ रहे है। तीन साल बाद आने वाले अधिक मास में पहले वर्ष 2007 में जेठ माह आया था। अधिक मास की शुरूआत 15 अप्रैल से शुरू होगी,जो 14 मई तक रहेगा। अधिक मास में भजन कीर्तन ही करना चाहिए। इस दौरान मांगलिक कार्यो से बचना चाहिए। पंडित दिनेश दिनकर के अनुसार धर्मग्रंथों में यह मास केवल भगवान की भक्ति के लिए होता है। निष्काम भाव से केवल धर्म कार्य,भागवत कथा,श्रवण,तीर्थ सत्संग करने से ही फल प्राप्त होता है। इस मास में सूर्य भगवान को भी नियमित रूप से अध्र्य देने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।19 साल का अजब संयोगफरवरी माह में बरसों बाद होली का संयोग करीब 19 साल बाद आ रहा है। इससे पहले वर्ष 1991 में भी फरवरी माह में ही होलिका दहन हुआ था। अब आगे भी वर्ष 1929 में ही फरवरी माह में हाली आएगी। यानि 19 साल बाद फिर से होली फरवरी में आएगी। जानकारों का कहना है कि तिथियों में क्षय के कारण ऐसा संयोग हो रहा है।

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