मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

चल रही है पत्नी पीड़ित संघ की भूख हड़ताल


जोधपुर. शादी के बाद वह मेरे पिताजी के नाम की जायदाद को खुद के नाम करवाने की जिद करने लगी। मैंने खूब समझाया लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी रही। मैं अपने माता-पिता से अलग नहीं होना चाहता था। यह बात उसे मंजूर नहीं हुई। उसकी नाजायज मांग न मानने पर तीन दिन जेल में बिताने पड़े।ऐसी बीवी से तो कुंवारा ही भला था। नई सड़क चौराहे पर पत्नी पीड़ित पति संघ के तत्वावधान में रविवार से शुरू हुई क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे लोगों से भास्कर ने बातचीत की तो उनके अंतस से वेदना के ऐसे ही स्वर फूटे। इस दौरान कुछ लोग तो अपनी व्यथा सुनाते-सुनाते सुबक पड़े।सरस्वती नगर निवासी मुकेश अग्रवाल की शादी 11 जुलाई 07 को पुंगलपाड़ा निवासी मोहनलाल जालानी की पुत्री अंजू के साथ हुई थी। छह महीने तो खुशी-खुशी गुजरे लेकिन बाद में पत्नी की एक मांग ने मुकेश के परिवार को मुश्किल में डाल दिया। मुकेश ने बताया कि उसकी पत्नी ने पिताजी का मकान खुद के नाम करवाने की जिद की।इसी बात को लेकर मार्च 08 को दोनों में झगड़ा हो गया। बात बढ़ते बढ़ते इस हद तक पहुंच गई कि अप्रैल 08 में पत्नी ने उसके खिलाफ दहेज प्रताड़ना व घरेलू हिंसा का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवा दिया। उसे तीन दिन जेल में बिताने पड़ गए। तब से अब तक वह माता-पिता से अलग किराए के मकान में रह रहा है ताकि उन पर तो आंच न आए।अब वह पत्नी से तलाक का इच्छुक है। विद्यानगर में रहने वाली विजयलक्ष्मी की कहानी भी कम कारुणिक नहीं है। उसने अपनी बहन के बेटे वीरेंद्र कुमार शर्मा को अपने बेटे की तरह पाला-पोसा और वर्ष 2004 में उसकी शादी नीमच में रहने वाली कल्पना से कर दी। कुछ साल तक सब कुछ ठीक-ठाक रहा, लेकिन आठ-दस माह पूर्व पति-पत्नी में झगड़ा हो गया।मौसी का मकान खुद के नाम पर करने की बात को लेकर वीरेंद्र की अपनी पत्नी से अनबन हो गई। उसे तो इसका खामियाजा भुगतना ही पड़ा, उसकी मौंसी व मौंसा विनोद कुमार को भी पुलिस ने बेजा तंग किया। अब न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। वीरेंद्र की मौंसी अब कल्पना के साथ कोई संबंध रखना नहीं चाहती।मेहरों का चौक नया बास में रहने वाले राकेश मेहरा की शादी 28 फरवरी 09 को अजमेर के वैशाली नगर निवासी राजेंद्र मेहरा की पुत्री कोमल के साथ हुई थी। यहां पर वधू पक्ष ने दहेज का सामान बाद में भेजने की बात कहते हुए बारात को रवाना कर दिया। वह सामान तो खैर क्या आना था, तीन जून को पीहर गई कल्पना भी लौट कर नहीं आई।इतने पर ही बात खत्म नहीं हुई। एक दिन अचानक ही अजमेर से आई पुलिस राकेश व उसके मां-बाप को पकड़कर ले गई। उन पर दहेज प्रताड़ना व घरेलू हिंसा का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया गया। तब से राकेश का पूरा परिवार परेशान है। हालांकि उसके पिता थानचंद मेहरा अब भी चाहते हैं कि उनकी पुत्रवधू घर लौट आए।

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