नीमकाथाना/नारनौल. हमउम्र कमला देवी, कबूल देवी और धन्नी देवी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस श्याम बाबा के दरबार में वे ध्वजा चढ़ाने जा रही हैं, वे ही इतनी जल्दी उनको अपने पास बुला लेंगे। कमला व धन्नी तो मन्नत पूरी होने पर श्याम बाबा की ध्वजा का जोड़ा पूरा करने जा रही थीं, जबकि कबूल पहली बार उनके साथ श्याम बाबा के दर्शनों की अभिलाषी थी। धन्नी देवी ने हृदय रोग से पीड़ित बेटी सुमन के स्वस्थ होने की कामना की थी। श्यामबाबा ने कामना पूरी की तो मां-बेटी दोनों साथ ध्वजा चढ़ाने जा रही थीं और हादसे में दोनों चल बसीं। कमला ने अपने भाई की जेल से रिहा होने की मन्नत मांगी थी। बाबा ने कामना पूरी कर दी थी और वह जोड़ा पूरा करने के लिए ध्वजा लेकर जा रही थी। कमला व धन्नी के बाबा के दरबार में जाने की खबर पाकर कबूल ने भी उनके साथ जाने का मन बना लिया। वह पहली बार श्याम दर्शन को जा रही थी, लेकिन वह इच्छा भी पूरी नहीं हो सकी। गांव के लोगों ने बताया कि तीनों का आपस में गहरा मेलमिलाप था। कमला व कबूल तो रिश्ते में जेठानी-देवरानी थीं। वैसे तीनों एक ही कुनबे की सदस्य थीं। खाटू श्याम जाते समय कमला के साथ उसकी पोती छोटी व दोहिता देवेंद्र भी था। उनका जत्था 21 फरवरी को सुबह गांव से रवाना हुआ था। हादसे की सूचना मिलते ही सभी लोग एकत्रित हो गए और बिना ध्वजा चढ़ाए ही वापस लौट आए।
मातम में बदला भक्ति का माहौल
विश्राम कैंप में श्रद्धालु भक्ति के रंग में सराबोर थे। चंद पल में ही काल बनकर आई ट्रेन ने पांच श्रद्धालुओं की जान ले ली। विश्राम कैंप का माहौल मातम में तब्दील हो गया।

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