जोधपुर. मारवाड़ में फागण की दस्तक के साथ ही होली के पारंपरिक गीतों का गायन शुरू हो गया है। जोधपुर में श्लील गाली गायन की खास परंपरा रही है जिसे कुछ लोग आगे बढ़ा रहे हैं तो कुछ इसका वर्षो से निर्वहन कर रहे हैं। इन दिनों भीतरी शहर की गलियों में श्लील गाली गायन की तैयारियां जोरों पर हैं। माईदास थानवी को श्लील गाली गायन का सरताज माना जाता है। उनकी गालियों का गजब का क्रेज है। हर साल वर्तमान परिवेश पर नई गालियां लिखी और गाई जाती हैं, लेकिन इस बार कई छोटे मियां भी इसमें पारंगत होकर जलवा दिखाने वाले हैं।
घणै मान अर घणै हेत सूं मिजमानी करां आपरी ,पधारो म्हारे देश |अठै थानै मिलसी नई अर पुराणी बातां ब्लॉग जगत री, तकनीक ,संगीत अर खान पान री |
शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010
इस बार छोटे मियां भी दिखाएंगे अपने जलवे
म्हारी सवा लाख री लुंब,गूम गई.............
वचनाराम देवासी सामरानी
म्हारी सवा लाख री लुंब,गूम गई ईंदानी ...........!राजस्थानी लोकगीत की यह पंक्तिया अब मात्र गुनगुनाते तक सिमित रह गई है!पनिहारी के सिर पर शोभित होने वाला मुकुट ईंदानी अब बीते जमाने की बात बन कर रह गई है!आजकल की युवतियो को ईंदानी की जानकारी ही नहीं है!क्योकि आज न तो पनघट है,और न ही पनिहारी तो फिर ईंदानी किस कम की!विज्ञानं के युग में घर-घर में नल व हैंडपंप लगे होने के कारण घर से बहार कोई पानी भरने की परम्परा ही खत्म हो गई है!जिस जमाने ईंदानी का रिवाज था उस समय बेटी की दहेज में अवश्य दी जाती है!राजस्थान के मारवाड़ अंचल में पानी पानी से भरे घड़े को सिर पर उठाने के लिए ईंदानी बढिया उपकरण हुआ करती थी!
गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010
30 मिनट में खाने का करें काम तमाम
कभी काम तमा स्कॉलरशिप तो कभी मार्कशीट की सेहत सुधारने के लिए पढ़ाई के मोर्चे पर प्रतियोगिता में जुटे रहने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रों की पेटपूजा भी अब प्रतियोगिता बन गई है। जी हां, जानकर हैरानी तो होगी लेकिन विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर की चर्चित बैम्बू कैंटीन में अब लंच करना भी प्रतियोगिता से कम नहीं रह गया है। दोपहर साढ़े बारह बजे से शुरू होने वाली यह प्रतियोगिता ढाई बजे तक चलती है और हर छात्र को सख्त हिदायत है कि वह आधे घंटे के भीतर न सिर्फ खाना लेगा बल्कि उसे खत्म क र सीट खाली करेगा।विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कैंपस में यहां-वहां नोटिस लगाकर छात्रों को सूचित किया जा रहा है कि अब बैम्बू कैंटीन में पेटपूजा के लिए होने वाली प्रतियोगिता के नए नियम क्या हैं। प्रशासन के मुताबिक अब लंच दोपहर 12:30 से 2:30 के बीच चार चरणों में होगा और एक बार में पचास से ज्यादा छात्रों को कैंटीन में एंट्री नहीं दी जाएगी। खास बात तो यह है कि हर छात्र को अपना खाना 30 मिनट के भीतर ही खत्म करना होगा। छात्रों की बात करें तो उनका कहना है कि आज जब हर मोर्चे पर कम्पीटिशन का सामना करना पड़ रहा है।प्रशासन के इस कदम से अब खाना भी चैन से खाना दूभर हो गया है। छात्रों ने बताया कि इस बात को लेकर जब उन्होंने कैंटीन संचालकों से शिकायत की तो उनका कहना था कि निर्धारित समय से पहले या बाद में आएं। लेकिन इस बात का उनके पास कोई जवाब न था कि पहले खाना तैयार नहीं हुआ और बाद में बचा नहीं तो क्या होगा? डिप्टी डीन छात्र कल्याण (दक्षिणी परिसर) डॉ. दिनेश वाष्ण्रेय ने बताया कि प्रशासन को यह कदम छात्रों के रवैये के मद्देनजर उठाना पड़ रहा है।छात्र लंबे समय तक कैंटीन में ही डटे रहते हैं चार लोगों की टेबल को दो-दो छात्र घेरे रखते हैं। ऐसे में जो छात्र खाना खाने के उद्देश्य से कैं टीन पहुंचते हैं उन्हें परेशानी होती है। डॉ. वाष्ण्रेय ने बताया कि कैंटीन में भीड़ बढ़ने का एक और कारण अरावली व सारामती हॉस्टल के छात्रों का भी यहां पहुंचना है। कारण हॉस्टल मेस का बंद होना है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कैंपस में बढ़ी भीड़ को देखते हुए यह व्यवस्था कुछ समय के लिए की गई है और जैसे ही स्थिति सुधरेगी और कैंटीन में पहुंचने वाले टाइमपास करना छोड़ खाना खाकर जगह छोड़ने लगेंगे तो समय की पाबंदी भी खत्म कर दी जाएगी।
समझौता एक्सप्रेस की सुरक्षा रामभरोसे
नई दिल्ली. भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली अटारी एक्सप्रेस (समझौता एक्सप्रेस) और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। ट्रेन के साथ ही लाखों यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के मात्र 212 जवानों के हवाले है। मालूम हो कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से रोजाना चार से पांच लाख यात्री यात्रा करते हैं। यह हालत उस समय है, जब अटारी एक्सप्रेस हर पल आतंकियों के निशाने पर रहती है। कुछ दिन पूर्व आतंकियों ने अटारी स्टेशन को ही उड़ाने की धमकी दी थी। इसके मद्देनजर केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने अटारी स्टेशन का दौरा भी किया। हालांकि सरकार का दावा है कि स्टेशन और यात्रियों की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है। लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। रेलवे के एक आला अधिकारी ने बताया कि आरपीएफ के 212 जवानों में से 30-40 जवान अटारी एक्सप्रेस के साथ पाकिस्तान तक जाते हैं। ट्रेन में अमूमन ढाई से तीन सौ यात्री सवार रहते हैं। ऐसे में जवानों पर अत्यधिक दबाव रहता है। यात्रियों के सामानों की जांच के लिए तीन स्कैनर मशीन हैं, लेकिन काम केवल एक ही करती है। दो स्कैनरों को तो अब तक स्थापित भी नहीं किया गया है। दोनों स्कैनर मशीन दो वर्ष से अधिक समय से रेलवे के गोदाम में धूल फांक रही हैं। सामानों की जांच शाम छह से रात के नौ बजे तक की जाती है। ऐसे में एक मशीन से सामानों की सही ढंग से जांच नहीं हो पाती है। उन्होंने बताया कि यात्री पहले बुकिंग के सामान अपने साथ ही ले जाते थे, लेकिन अब एसएलआर के माध्यम से जाता है। यानी बुकिंग के सामानों की अलग से जांच की जाती है। इसके अलावा सामानों की बुकिंग पहले से नहीं की जाती है। यात्रा के दिन ही बुकिंग की जाती है, जिसके चलते भी जांच में देरी हो जाती है। उन्होंने बताया कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के 18 प्लेटफार्मो की सुरक्षा और जांच भी आरपीएफ के इन्हीं जवानों को करनी होती है। जवानों की भारी कमी के बारे में रेल मंत्रालय को कई बार सूचित किया जा चुका है। लेकिन, आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गौरतलब है कि 18 फरवरी 2007 को आतंकियों ने अटारी एक्सप्रेस को निशाने पर लिया था। जिसमें कई यात्रियों की जान चली गई!बुधवार, 24 फ़रवरी 2010
अखियां श्याम दरस की प्यासी..
खाटूश्यामजी. दूर दराज से कई किमी का सफर, लंबी पदयात्रा और घंटों कतार, भक्त ये सब कुछ बस बाबा की एक झलक पाने के लिए कर रहे हैं। इतने जतन के बाद लखधणी दातार के दरबार में दर्शन के लिए जो एक मिनट का समय मिल रहा है वह एक साथ 350 श्रद्धालुओं की झोली खुशियों से भर रहा है। दशमी के दिन तक बाबा के दरबार में करीब छह लाख श्रद्धालुओं की हाजरी लग चुकी है। बाबा के दर्शनों की आस, देश कोने-कोने से श्याम भक्तों को खींच ला रही है। बाबा का मुख्य मेला गुरुवार को भरेगा। एकादशी के मौके पर भरने वाले मेले में करीब चार लाख से अधिक श्रद्धालु जुटने की उम्मीद है। हर तरफ आस्था, भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है। खाटूधाम की धर्मशालाआंे में भी श्याम के भजन कीर्तनों का दौर चल रहा है। श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने के कारण बुधवार को प्रशासन को रींगस-खाटूश्यामजी मार्ग को वनवे में तब्दील करना पड़ा है। श्रद्धालुओं की भीड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रींगस से खाटूश्यामजी 20 मिनट मे पहुंचने वाले वाहन अब तीन घंटे मे खाटू पहुंच रहे हैं। अलग-अलग टोलियों और निशानों के साथ भक्त बाबा के दरबार में पहुंच रहे हैं।
गुजरात में बन रहा है अनोखा वृक्ष मंदिर
अहमदाबाद. पर्यावरणीय संतुलन को लेकर पूरी दुनिया चिंतित है। ग्लोबल वॉर्मिग की समस्या से निपटने के लिए चिंतन, मनन व मंथन चल रहा है। इस बीच गुजरात के विरमगाम के भाजपा विधायक कमाभाई राठौड ने एक अनूठा प्रयास आरंभ किया है। वे अपने गांव वडगाम में वृक्ष मंदिर बनवा रहे हैं। इस अनूठे मंदिर में भगवान शंकर के साथ ही वृक्ष देव के रूप में तुलसी की पूजा की जाएगी।उधर, मंदिर में दर्शन करने आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को कहीं न कहीं एक वृक्ष रोपना पड़ेगा। हाल ही में इस मंदिर का शिलान्यास किया गया था। इस अनूठे मंदिर का निर्माण कार्य आरंभ कर दिया गया है और आगामी दो महीने में इसके बनकर तैयार होने की उम्मीद है। विरमगाम के भाजपा विधायक कमाभाई अपनी जमीन पर वृक्ष मंदिर बनवा रहे हैं। मंदिर में पौध उपलब्ध करवाने के लिए वन विभाग ने अनुमति
रेल बजट से खुश नहीं मेवाड़
उदयपुर. रेल बजट की घोषणा के बाद मेवाड़ की दशा मावली—बड़ी सादड़ी रेल खंड की भांति दिखाई दे रही है जिसका धणी—धोरी कोई नहीं है। मेन लाइन से बहुत दूर व विकास की धारा से भटके हुए मेवाड़ को बजट में रेल मंत्री ममता बैनर्जी ने पूरी तरह से निराश किया है। कांग्रेस के नेताओं ने बजट को संतुलित बताया और भाजपा ने पूरी तरह निराशजनक। रेलों में यात्री किराया व माल भाड़ा न बढ़ाना राहत की बात है मगर विकास की दृष्टि से मेवाड़ ठगा सा रह गया है। उदयपुर से कम से कम दो नई गाड़ियां चलने, बांद्रा, इंदौर व सियालदाह एक्सप्रेस के फेरे बढ़ने, चेटक एक्सप्रेस का मार्ग बदलने व अजमेर इंटरसिटी को जयपुर तक चलाने की बजट में घोषणा की उम्मीद थी।
कैसी होगी तेरी रात परदेस में
कैसी होगी तेरी रात परदेस में,
चाँद पूछेगा हालात परदेस में।
ख्व़ाब बनकर निगाहों में आ जाएँगे,
हम करेंगे, मुलाकाल परदेस में।
बादलों से कहेंगे कि कर दे वहाँ,
आँसुओं की ये बरसात परदेस में।
रंग चेहरे पे लब पे हँसी दिल को चैन,
कौन देगा ये सौग़ात परदेस में।
तुमको महसूस होती नहीं जो यहाँ,
याद आएगी वो बात परदेस में।
हर क़दम पे नज़र तुमको आएँगे हम,
देखना ये करामात परदेस में।
ज़ेहन की वादियों में सजालो इन्हें,
काम आएँगे जज्ब़ात परदेस में।
आपसे जब सामना होने लगा,
ज़िन्दगी में क्या से क्या होने लगा।
चैन मिलता है तड़पने से हमें,
दर्द ही दिल की दवा होने लगा।
ज़िन्दगी की राह मुश्किल हो गई,
हर क़दम पर हादसा होने लगा।
दोस्तों से दोस्ती की बात पर,
फ़ासला दर फ़ासला होने लगा।
जो ग़जल में शेर बनकर के रहा,
काफ़ियों से वो ज़ुदा होने लगा।
जैसे हो तस्वीर इक दीवार पर,
आदमी अब क्या से क्या होने लगा।
ये तुम्हारी याद है या ज़ख्म है,
दर्द पहले से सिवा होने लगा।
मोतियों की तरह चेहरा तेरा सच्चा लगता,
हमको दुनिया में कोई और न अच्छा लगता।
तेरे माथे पे जो बिंदिया है, सलामत रखना,
ये अँधेरों में कोई चाँद चमकता लगता।
किस तरह आँख मिलायें, कभी ये तो बतला,
तेरी पलकों पे सदा शर्म का पहरा लगता।
मैंने माँगा था इबादत में, इन्हीं लमहों को,
साथ में तेरे मुझे वक्त भी ठहरा लगता।
तेरे बिन ये पहला-दिन,
सूना-सूना निकला दिन।
सूरज किरनें धूप वही,
फिर भी बदला बदला दिन।
तेरे साये, ढूंढ़ रहा है,
कैसा है ये पगला दिन।
तनहाई के सन्नाटों में,
घूमा झुंझला-झुंझला दिन।
शाम तलक तड़पा यादों में,
फिर मुश्किल से सम्भला दिन।
ढूंढ़ता है आदमी, सदियों से दुनिया, में सुकून।
धूप में साया मिले, कमल जाये सहरा में सुकून।
छटपटाती है किनारों, पर मिलन की आस में
हर लहर पा जाती है, जाकर के दरिया में सुकून।
बेक़रारी है कभी, पूरे समन्दर की तरह,
और कभी मिल जाता है बस, एक क़तरे में सुकून।
ज़िन्दगी को इससे ज्य़ादा और क्या कुछ चाहिए?
लबस हो इक प्यार का, और उसके लमहात में सुकून।
हर सवाली चेहरे पे लिख़ी इबारत देखिए,
चैन है कि न आँखों में, और कौन से दिल में सुकून।
वो खुदा से कम नहीं लगता है, मुझको दोस्तो,
मेरे ख़ातिर माँगता है जो दुआओं में सुकून।
ये उसी दामन की भीनी खुशबू का एहसास है,
जो मुझे महसूस होता है हवाओं में सुकून।
ममता ने किया सबको खुश
नई दिल्ली। रेल मंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर लोकलुभावन बजट पेश किया। पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यात्री किराए व माल भाडे में कोई बढोतरी नहीं की गई है। उल्टा खाद्य पदार्थो व केरोसीन के मालभाडे में सौ रूपए की कमी भी की गई है। ममता ने रेलवे को मानवीय चेहरा देने की कोशिश के तहत एक बडा कदम उठाते हुए कैंसर रोगियों को स्लीपर व एसी थ्री में मुफ्त में यात्रा की सुविधा मुहैया कराई है।ममता ने कहा कि पांच साल में पूरे देश को रेल से जोड दिया जाएगा। आधारभूत ढांचे पर वर्ष ध्यान देते हुए एक हजार किमी तक का रेलवे ट्रेक बनेगा। साथ ही 94 स्टेशनों को अपग्र्रेड को किया जाएगा। कई स्टेशनों का नाम महापुरूषों पर रखा जाएगा। 54 नई ट्रेनें चलाई जाएगी। और 10 दूरतों ट्रेनें चलेंगी। इनमें जयपुर-मुंबई भी एक है। यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखते हुए ई टिकट सरचार्ज 40 रूपए से घटाकर 20 रूपए किया जाएगा।
अधूरी रह गई दर्शन की आस
नीमकाथाना/नारनौल. हमउम्र कमला देवी, कबूल देवी और धन्नी देवी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस श्याम बाबा के दरबार में वे ध्वजा चढ़ाने जा रही हैं, वे ही इतनी जल्दी उनको अपने पास बुला लेंगे। कमला व धन्नी तो मन्नत पूरी होने पर श्याम बाबा की ध्वजा का जोड़ा पूरा करने जा रही थीं, जबकि कबूल पहली बार उनके साथ श्याम बाबा के दर्शनों की अभिलाषी थी। धन्नी देवी ने हृदय रोग से पीड़ित बेटी सुमन के स्वस्थ होने की कामना की थी। श्यामबाबा ने कामना पूरी की तो मां-बेटी दोनों साथ ध्वजा चढ़ाने जा रही थीं और हादसे में दोनों चल बसीं। कमला ने अपने भाई की जेल से रिहा होने की मन्नत मांगी थी। बाबा ने कामना पूरी कर दी थी और वह जोड़ा पूरा करने के लिए ध्वजा लेकर जा रही थी। कमला व धन्नी के बाबा के दरबार में जाने की खबर पाकर कबूल ने भी उनके साथ जाने का मन बना लिया। वह पहली बार श्याम दर्शन को जा रही थी, लेकिन वह इच्छा भी पूरी नहीं हो सकी। गांव के लोगों ने बताया कि तीनों का आपस में गहरा मेलमिलाप था। कमला व कबूल तो रिश्ते में जेठानी-देवरानी थीं। वैसे तीनों एक ही कुनबे की सदस्य थीं। खाटू श्याम जाते समय कमला के साथ उसकी पोती छोटी व दोहिता देवेंद्र भी था। उनका जत्था 21 फरवरी को सुबह गांव से रवाना हुआ था। हादसे की सूचना मिलते ही सभी लोग एकत्रित हो गए और बिना ध्वजा चढ़ाए ही वापस लौट आए।
मातम में बदला भक्ति का माहौल
विश्राम कैंप में श्रद्धालु भक्ति के रंग में सराबोर थे। चंद पल में ही काल बनकर आई ट्रेन ने पांच श्रद्धालुओं की जान ले ली। विश्राम कैंप का माहौल मातम में तब्दील हो गया।
मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010
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