मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

फाल्गुन में गिरी सावन-सी फुहार

जब लोग जागे तो आसमान की ओर निहारते उन्हें लगा नहीं कि ये फाल्गुन का महीना है। दिनभर गिरी फुहारे और बूंदाबांदी ने सावन की याद दिला ताजा कर दी। मौसम का मिजाज बदलते ही लोगों की दिनचर्या भी बदल गई। कुछ भीगने से बचते रहे तो कुछ सर्दी में भी फुहारों का आनंद लेते देखे गए। सुबह से ही बादलों ने पूरा आसमान ढ़क लिया था। सुबह लोग तैयार होकर कार्यालय की ओर रवाना होने की तैयारी कर रहे थे कि करीब साढ़े नौ बजे फुहारें गिरनी शुरू हो गई और उसके बाद दिनभर टिप-टिप का दौर जारी रहा। हालांकि सुबह नौ बजे के करीब कुछ देर के लिए धूप निकली। धूप निकलते ही लोग तैयार होकर कार्यालय की ओर रवाना होने ही वाले थे कि फिर से बूंदाबांदी शुरू हो गई। उसके बाद दिन में रह-रहकर फुहारें पड़ती रही। दोपहर तक इतनी बारिश हो चुकी थी कि सड़कें गीली हो गई। लोग बूंदाबांदी के कारण कहीं निकल नहीं पा रहे थे क्योंकि कुछ देर ठहरने के बाद फिर से बूंदाबांदी शुरू हो जाती। 12 बजे के करीब इतने बादल इतने घिर गए मानो तेज बारिश होगी मगर कुछ देर ही बूंदाबांदी हुई। तीन बजे के करीब फिर से सूर्य बादलों की ओट से निकलने की कोशिश करता रहा मगर उसका प्रयास सफल नहीं हो सका। स्कूल की छुट्टी होते ही अभिभावक छाता लेकर स्कूल पहुंच गए ताकि बच्चे भीगक र घर नहीं आएं। जिन बच्चों के अभिभावक ऐसा नहीं कर पाए उनके बच्चे भीगते हुए घर पहुंचे। मौसम का असर बाजार पर भी पड़ा। बूंदाबांदी के कारण लोग घर से नहीं निकले जिसके कारण बाजार में दिनभर रौनक फीकी रही। सड़कों पर भी भीड़-भाड़ कम रही। जैसे ही कुछ देर के लिए बूंदाबांदी बंद होती लोग कुछ काम निबटाने के लिए निकल जाते मगर बीच में फुहारें पड़ते ही सुरक्षित जगह ठहर जाते। लोग इससे परेशान भी हुए क्योंकि इससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई। दूसरी ओर मौसम का मिजाज बदलते ही समौसे-कचौड़ी और चाय की थडिय़ों पर भीड़ लग गई। दिनभर में 2.5 मिलीटर बारिश दर्ज की गई।इसलिए बदला मौसम का मिजाजमौसम विभाग ने एक दिन पहले ही प्रदेश में मौसम के परिवर्तन के संकेत दे दिए थे। बीते 24 घंटे से पश्चिमी विक्षोभ का असर प्रदेश पर बना हुआ है इसी कारण रविवार को तापमान बढ़ गया था और सोमवार को बादल और बूंदाबांदी का सामना करना पड़ा। जयपुर मौसम विभाग के मुताबिक आगामी दो दिनों तक बादल छाए रहने और बूंदाबांदी की संभावना है। इसके बाद मौसम सामान्य होगा।

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