कभी काम तमा स्कॉलरशिप तो कभी मार्कशीट की सेहत सुधारने के लिए पढ़ाई के मोर्चे पर प्रतियोगिता में जुटे रहने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रों की पेटपूजा भी अब प्रतियोगिता बन गई है। जी हां, जानकर हैरानी तो होगी लेकिन विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर की चर्चित बैम्बू कैंटीन में अब लंच करना भी प्रतियोगिता से कम नहीं रह गया है। दोपहर साढ़े बारह बजे से शुरू होने वाली यह प्रतियोगिता ढाई बजे तक चलती है और हर छात्र को सख्त हिदायत है कि वह आधे घंटे के भीतर न सिर्फ खाना लेगा बल्कि उसे खत्म क र सीट खाली करेगा।विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कैंपस में यहां-वहां नोटिस लगाकर छात्रों को सूचित किया जा रहा है कि अब बैम्बू कैंटीन में पेटपूजा के लिए होने वाली प्रतियोगिता के नए नियम क्या हैं। प्रशासन के मुताबिक अब लंच दोपहर 12:30 से 2:30 के बीच चार चरणों में होगा और एक बार में पचास से ज्यादा छात्रों को कैंटीन में एंट्री नहीं दी जाएगी। खास बात तो यह है कि हर छात्र को अपना खाना 30 मिनट के भीतर ही खत्म करना होगा। छात्रों की बात करें तो उनका कहना है कि आज जब हर मोर्चे पर कम्पीटिशन का सामना करना पड़ रहा है।प्रशासन के इस कदम से अब खाना भी चैन से खाना दूभर हो गया है। छात्रों ने बताया कि इस बात को लेकर जब उन्होंने कैंटीन संचालकों से शिकायत की तो उनका कहना था कि निर्धारित समय से पहले या बाद में आएं। लेकिन इस बात का उनके पास कोई जवाब न था कि पहले खाना तैयार नहीं हुआ और बाद में बचा नहीं तो क्या होगा? डिप्टी डीन छात्र कल्याण (दक्षिणी परिसर) डॉ. दिनेश वाष्ण्रेय ने बताया कि प्रशासन को यह कदम छात्रों के रवैये के मद्देनजर उठाना पड़ रहा है।छात्र लंबे समय तक कैंटीन में ही डटे रहते हैं चार लोगों की टेबल को दो-दो छात्र घेरे रखते हैं। ऐसे में जो छात्र खाना खाने के उद्देश्य से कैं टीन पहुंचते हैं उन्हें परेशानी होती है। डॉ. वाष्ण्रेय ने बताया कि कैंटीन में भीड़ बढ़ने का एक और कारण अरावली व सारामती हॉस्टल के छात्रों का भी यहां पहुंचना है। कारण हॉस्टल मेस का बंद होना है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कैंपस में बढ़ी भीड़ को देखते हुए यह व्यवस्था कुछ समय के लिए की गई है और जैसे ही स्थिति सुधरेगी और कैंटीन में पहुंचने वाले टाइमपास करना छोड़ खाना खाकर जगह छोड़ने लगेंगे तो समय की पाबंदी भी खत्म कर दी जाएगी।

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