मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

दुल्हन नहीं, शव पहुंचा ससुराल

उदयपुर. राजसमंद के कोठारिया से तीन दिन पहले सात फेरे लेकर ससुराल झालावाड़ रवाना हुई दुल्हन कल्पना मावली के पास सड़क हादसे में जख्मी हुई थी। तीन दिन अस्पताल में बेसुध सांसें लेकर नववधू ने शुक्रवार तड़के साढ़े चार बजे अंतिम सांस ली।
रो रोकर बेहाल परिजनों ने ससुराल वालों की इच्छा का सम्मान रखते हुए अपनी बिटिया के निर्जीव शरीर को दुबारा विदा किया लेकिन अबकी बार सुखी जीवन के आशीर्वाद की बजाय प्रार्थना उसके मोक्ष के लिए थी। एमबी अस्पताल में तीन दिन तक कल्पना जीवन मृत्यु के बीच झूलती रही, चिकित्सकों ने पूरी कोशिश की लेकिन दवाओं और दुआओं के बावजूद वार्ड से लाल जोड़े में सजी धजी दुल्हन का शव ही बाहर आया। मृतका के हाथों की मेहंदी का रंग उतना ही गाढ़ा था और कांकण डोरे तक जस के तस बंधे हुए थे।
नव ब्याहता को जड़ देखकर भावनाओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि मुर्दाघर के बाहर परिजन पड़ोसी, ससुराल वाले तो रोए ही, यहां तक अस्पताल कर्मचारियों की भी आंखें भर आईं। रूदन और क्रंदन से गमगीन माहौल भारी हो गया। हादसे में घायल दूल्हे अभिनव सिंह सोनगरा की हालत भी खराब थी। दाम्पत्य जीवन के पहले कदम पर ही अपनी जीवन साथी से बिछोह पर मानों दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा। ढांढस देने वालों के पास भी शब्द नहीं थे तो वे उसे क्या समझाते। सभी बस यही कहते सुनते रहे, कि दुल्हन अपने ससुराल की देहलीज भी ना चढ़ सकी।

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