गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

समझौता एक्सप्रेस की सुरक्षा रामभरोसे

नई दिल्ली. भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली अटारी एक्सप्रेस (समझौता एक्सप्रेस) और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। ट्रेन के साथ ही लाखों यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के मात्र 212 जवानों के हवाले है। मालूम हो कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से रोजाना चार से पांच लाख यात्री यात्रा करते हैं। यह हालत उस समय है, जब अटारी एक्सप्रेस हर पल आतंकियों के निशाने पर रहती है। कुछ दिन पूर्व आतंकियों ने अटारी स्टेशन को ही उड़ाने की धमकी दी थी। इसके मद्देनजर केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदंबरम ने अटारी स्टेशन का दौरा भी किया। हालांकि सरकार का दावा है कि स्टेशन और यात्रियों की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है। लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। रेलवे के एक आला अधिकारी ने बताया कि आरपीएफ के 212 जवानों में से 30-40 जवान अटारी एक्सप्रेस के साथ पाकिस्तान तक जाते हैं। ट्रेन में अमूमन ढाई से तीन सौ यात्री सवार रहते हैं। ऐसे में जवानों पर अत्यधिक दबाव रहता है। यात्रियों के सामानों की जांच के लिए तीन स्कैनर मशीन हैं, लेकिन काम केवल एक ही करती है। दो स्कैनरों को तो अब तक स्थापित भी नहीं किया गया है। दोनों स्कैनर मशीन दो वर्ष से अधिक समय से रेलवे के गोदाम में धूल फांक रही हैं। सामानों की जांच शाम छह से रात के नौ बजे तक की जाती है। ऐसे में एक मशीन से सामानों की सही ढंग से जांच नहीं हो पाती है। उन्होंने बताया कि यात्री पहले बुकिंग के सामान अपने साथ ही ले जाते थे, लेकिन अब एसएलआर के माध्यम से जाता है। यानी बुकिंग के सामानों की अलग से जांच की जाती है। इसके अलावा सामानों की बुकिंग पहले से नहीं की जाती है। यात्रा के दिन ही बुकिंग की जाती है, जिसके चलते भी जांच में देरी हो जाती है। उन्होंने बताया कि पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के 18 प्लेटफार्मो की सुरक्षा और जांच भी आरपीएफ के इन्हीं जवानों को करनी होती है। जवानों की भारी कमी के बारे में रेल मंत्रालय को कई बार सूचित किया जा चुका है। लेकिन, आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गौरतलब है कि 18 फरवरी 2007 को आतंकियों ने अटारी एक्सप्रेस को निशाने पर लिया था। जिसमें कई यात्रियों की जान चली गई!

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