रानीवाडा .बारिश की कमी व चारे की अपर्याप्त उपलब्धता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में चारे के भाव आसमान छू रहे हैं। ज्वार की कुट्टी गेहूं से भी महंगी हो गई है। ज्वार की कुट्टी तो चारा डिपो से गायब सी हो गई है। ऐसे में काश्तकार पशुओं को खाखला खिला रहे हैं। ज्वार की कुट्टी मध्यप्रदेश से आ रही है। ब्यावर, किशनगढ़ व केकड़ी क्षेत्र में इसके भाव 1275 से 1300 रुपए क्विंटल हैं। गेहूं के भाव राशन की दुकानों पर एपीएल फ्रीसेल तक 1250 रुपए क्विंटल हैं। एपीएल में भी रेग्यूलर व स्पेशल की दर इससे भी कम है लेकिन काश्तकार पशुओं की सेहत के लिए मजबूरन ज्वार की कुट्टी भी खिला रहे हैं। हालांकि चारा महंगा होने के कारण अधिसंख्य काश्तकार ज्वार की कुट्टी खरीद ही नहीं पा रहे, वे पशुओं को खाखला (भूसा) खिला रहे हैं। दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए काश्तकार खाखले में डेयरी का पशु आहार मिला रहे हैं। झालावाड़ व कोटा से आने वाले खाखले में सिर्फ 130 रुपए क्विंटल की सब्सिडी होने के कारण काश्तकार मध्यप्रदेश से आने वाला खाखला ही खरीद रहे हैं। इस पर दो सौ रुपए क्विंटल की सब्सिडी है। मध्यप्रदेश से आने वाली ज्वार की कुट्टी पर सौ रुपए क्विंटल की सब्सिडी भी बंद कर दी गई है।

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