इस ब्लड बैंक को तमिलनाडु वेटरिनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी ने शुरू किया है। यह उन लोगों के लिए बडी राहत लेकर आया है, जो अपने पालतू कुत्तों के इलाज के लिए भटकते हैं और जरूरत के अनुरूप ब्लड न मिलने पर निराश हो जाते हैं। इंसानों की तरह ही जानवरों में भी यदि वक्त रहते खून चढाया जाए, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। दुनिया में ऎसी कई मिसालें हैं, जिनमें कई लोगों ने पैसे की परवाह न करते हुए अपने पालतू साथी का जटिल ऑपरेशन कराया हो और उसकी जान बचाई हो।
ब्लड डोनर्स का अभाव
यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉक्टर पी. थंगाराजू का कहना है कि ऎसे ब्लड बैंक की बहुत ज्यादा जरूरत थी, क्योंकि उनके पास सप्ताह में कम से कम दो ऎसे मामले आते हैं, जिन्हें खून की बेहद जरूरत होती है। देश में अब तक ऎसा कोई ब्लड बैंक नहीं था। साथ ही, ब्लड कलेक्शन और ब्लड स्टोरेज जैसी कोई सुविधा देश में मौजूद नहीं थी। इसके अलावा ब्लड डोनर्स का अभाव भी एक बडी समस्या रही। जब भी रक्त की जरूरत पडती, तो डोनर्स ही नहीं मिलते थे। या कई बार डोनर के मिलने में इतनी देर हो जाती, कि मरीज कुत्ता अपनी जान गंवा बैठता था।
कुत्तों के भी ब्लड टाइप
ब्लड बैंक इंचार्ज डॉक्टर एस. प्रथाबन ने बताया कि ब्लड टाइपिंग भी एक समस्या रहा करती थी, क्योंकि इंसानों की तरह कुत्तों के भी ब्लड टाइप्स होते हैं। लेकिन अब इस समस्या से निजात मिल गई है और टाइपिंग भी संभव हो सकी है। डोनर्स को प्रोत्साहन देने के लिए तमिलनाडु वेटरिनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी ने एक स्कीम भी शुरू की है जिसके तहत डोनर को एक हजार रूपए का ग्रीन कार्ड दिया जाएगा ताकि वे अस्पताल पहुंचते ही अपना ट्रीटमेंट मुफ्त में करवा सकें। ग्रीन कार्ड एक साल तक के लिए वैध होगा। देश में अपनी तरह के पहले ब्लड बैंक में पहला ब्लड डोनर 'हॉट डॉग' नामक कुत्ता बना है। संस्थान का प्रयास है कि वह देशभर में पालतू जानवर रखने वाले लोगों के बीच इस बात की जागरूकता फैलाएं कि वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में अपने पालतू साथी को रक्तदान के लिए वहां लाएं।

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